मोक्ष प्राप्ति के बाद जीव कहां स्थित रहता है.? इसको समझने के लिए यह लेख पढ़ें
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July 12, 2025
मोक्ष प्राप्ति के बाद जीव (आत्मा) कहां स्थित रहता है — इसका उत्तर अलग-अलग दर्शनों और धर्मों में अलग-अलग होता है। नीचे कुछ मुख्य तीन भारतीय दर्शनों के अनुसार बताया गया है :-
1. वेदांत (अद्वैत वेदांत) के अनुसार:
मोक्ष का अर्थ है — आत्मा का ब्रह्म (परमात्मा) में लीन हो जाना।मोक्ष प्राप्त जीव स्वरुप में ही ब्रह्म बन जाता है।स्थिति: आत्मा की कोई व्यक्तिगत स्थिति नहीं रहती, वह साकार सीमाओं से परे हो कर “सत्य, चित्, आनन्द” स्वरूप ब्रह्म में एक रूप हो जाती है।
“ब्रह्म सत्यं, जगन्मिथ्या, जीवो ब्रह्मैव नापरः”
2. द्वैत वेदांत (मध्वाचार्य) के अनुसार:
आत्मा और परमात्मा अलग हैं। मोक्ष में जीव परमात्मा के धाम (जैसे वैकुण्ठ या गोलोक) में निवास करता है। वह वहां शाश्वत सेवा, आनंद और ज्ञान में स्थित रहता है, लेकिन परमात्मा से पृथक अस्तित्व बनाए रखता है।
3. जैन दर्शन के अनुसार:
मोक्ष प्राप्त आत्मा संसार चक्र से मुक्त हो कर लोक के सर्वोच्च भाग – सिद्धशिला में जाती है। सिद्धशिला एक स्थायी, शाश्वत स्थान है जो लोक के ऊपर स्थित होता है। वहां आत्मा शुद्ध ज्ञान, दर्शन, सुख और अनन्त शक्ति में स्थित रहती है।
4. बौद्ध मत के अनुसार:
बौद्ध धर्म में आत्मा का स्थायी स्वरूप नहीं होता।मोक्ष (निर्वाण) का अर्थ है — जन्म-मरण के चक्र का अंत।स्थिति: निर्वाण कोई भौतिक स्थान नहीं, बल्कि क्लेशों, इच्छाओं और अज्ञान का पूर्ण क्षय है। यह एक अवस्था है, स्थान नहीं।
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