June 5, 2026 7:28 am
June 5, 2026 7:28 am

आध्यात्मिक चिंतन: जन्म मरण किसका होता है, आत्मा या जीवात्मा का.? 

SHARE:

इसको विस्तार से समझते हैं 

? आत्मा (Brahman या परमात्मा): यह शुद्ध, अमर, अचल और निराकार है। इसका न तो जन्म होता है और न ही मरण।

भगवद गीता के (अध्याय 2, श्लोक 20) में भी कहा गया है कि “न जायते म्रियते वा कदाचि‍न्‍…” “आत्मा का न जन्म होता है, ओर न मृत्यु।”

? दुसरी ओर जीवात्मा (Individual soul): यह आत्मा का ही एक प्रतिबिंब है जो माया के प्रभाव से शरीर में बंध जाता है। ओर जब जीवात्मा शरीर धारण करती है तो उसे “जन्म” कहते हैं, और जब वह शरीर त्यागती है तो उसे “मरण” कहते हैं। धार्मिक ग्रंथ गीता के अनुसार: “वासांसि जीर्णानि यथा विहाय…”

अर्थात् “जैसे पुराने कपड़े छोड़कर नए कपड़े धारण करता है, वैसे ही आत्मा एक शरीर छोड़कर दूसरा धारणा कर लेती है।”

उपरोक्त बातों का निष्कर्ष: यह है कि 
आत्मा सदा अमर है — न उसका जन्म होता है न मरण।
जब की जीवात्मा, जब शरीर धारण करती है, तब उसे जन्म और मृत्यु का अनुभव होता है।
?

 जांभाणी लाइव ऐप इस लिंक की मदद से https://play.google.com/store/apps/details?id=com.jambhaniliveapp

एक विशेष आग्रह – आप जांभाणी लाइव ऐप के वार्षिक, अर्द्धवार्षिक, व मासिक सब्सक्राइबर्स सदस्य भी बन कर भक्ति मार्ग का लाभ उठा सकते हैं। 

सदस्यता लेने के लिए यह सुची

देखें ओर निचे दी हुई लिंक पर जा कर अपना पंसिदा पैकेज के अनुसार सीधे ऐप को भुगतान करें https://razorpay.me/@jambhanilive