आध्यात्मिक चिंतन: जन्म मरण किसका होता है, आत्मा या जीवात्मा का.?
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Latest, Religion - Karma
July 7, 2025
वैसे तो “जन्म” और “मरण” का संबंध शरीर और जीवात्मा (individual soul) से होता है, आत्मा से नहीं।
इसको विस्तार से समझते हैं
आत्मा (Brahman या परमात्मा): यह शुद्ध, अमर, अचल और निराकार है। इसका न तो जन्म होता है और न ही मरण।
भगवद गीता के (अध्याय 2, श्लोक 20) में भी कहा गया है कि “न जायते म्रियते वा कदाचिन्…” “आत्मा का न जन्म होता है, ओर न मृत्यु।”
दुसरी ओर जीवात्मा (Individual soul): यह आत्मा का ही एक प्रतिबिंब है जो माया के प्रभाव से शरीर में बंध जाता है। ओर जब जीवात्मा शरीर धारण करती है तो उसे “जन्म” कहते हैं, और जब वह शरीर त्यागती है तो उसे “मरण” कहते हैं। धार्मिक ग्रंथ गीता के अनुसार: “वासांसि जीर्णानि यथा विहाय…”
अर्थात् “जैसे पुराने कपड़े छोड़कर नए कपड़े धारण करता है, वैसे ही आत्मा एक शरीर छोड़कर दूसरा धारणा कर लेती है।”
उपरोक्त बातों का निष्कर्ष: यह है कि आत्मा सदा अमर है — न उसका जन्म होता है न मरण। जब की जीवात्मा, जब शरीर धारण करती है, तब उसे जन्म और मृत्यु का अनुभव होता है। इस विषय पर विस्तृत लाइव चर्चा के लिए डाउनलोड करें